भारत पर ट्रंप टैरिफ" एक ऐसा विषय है जो अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक रिश्तों में 2017-2021 के दौरान डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल में उठाए गए कदमों से जुड़ा है। चलिए इसे सरल भाषा में समझते हैं:
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📌 ट्रंप टैरिफ क्या था?
टैरिफ का मतलब होता है "आयात शुल्क" — यानी जब कोई देश दूसरे देश से कोई सामान खरीदता है, तो उस पर सरकार टैक्स लगाती है।
डोनाल्ड ट्रंप की "America First" नीति के तहत उन्होंने कई देशों से आने वाले सामान पर भारी टैरिफ लगाया। इसका मकसद था:
अमेरिकी उद्योगों की रक्षा करना
ट्रेड डेफिसिट (व्यापार घाटा) को कम करना
घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना
भारत भी इससे अछूता नहीं रहा।
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🇮🇳 भारत पर ट्रंप टैरिफ के असर:
1. जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज़ (GSP) खत्म किया गया (2019):
अमेरिका ने भारत को दिए गए GSP ट्रेड बेनिफिट को रद्द कर दिया।
इससे पहले भारत के 2,000 से ज्यादा प्रोडक्ट्स (जैसे टेक्सटाइल, जेम्स, ऑर्गेनिक केमिकल्स) बिना टैक्स अमेरिका में जा सकते थे।
रद्द होने से भारत के निर्यातकों को नुकसान हुआ, और लागत बढ़ी।
2. भारत ने भी जवाबी टैरिफ लगाया:
ट्रंप सरकार की टैरिफ नीति के जवाब में भारत ने भी अमेरिकी सामानों (जैसे बादाम, अखरोट, सेब) पर टैरिफ बढ़ा दिए।
3. ट्रेड डील टलती रही:
दोनों देशों के बीच एक "मिनी ट्रेड डील" की बातचीत चल रही थी, लेकिन ट्रंप के कार्यकाल में कोई ठोस समझौता नहीं हो पाया।
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🤝 आगे क्या हुआ?
जो बाइडेन सरकार आने के बाद दोनों देशों ने फिर से व्यापारिक रिश्तों को सुधारने की कोशिश की।
कुछ सेक्टरों में सहमति बनी और GSP की बहाली पर भी बातचीत हुई, लेकिन अब तक (2025 तक) GSP पूरी तरह बहाल नहीं हुआ है।
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निष्कर्ष:
ट्रंप टैरिफ ने भारत-अमेरिका व्यापार में तनाव बढ़ाया, लेकिन दोनों देशों ने रिश्तों को खराब होने से बचाया और बातचीत का रास्ता खुला रखा।
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