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कृत्रिम बारिश (Artificial Rain) एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें विशेष तकनीकों का उपयोग करके बादलों से मानव-निर्मित बारिश कराई जाती है। इसे आमतौर पर क्लाउड सीडिंग (Cloud Seeding) कहा जाता है।
🌧️ कृत्रिम बारिश की प्रक्रिया कैसे होती है?
1. सही बादलों का चयन:
सबसे पहले, ऐसे बादलों की पहचान की जाती है जिनमें नमी होती है और जो प्राकृतिक रूप से बारिश कर सकते हैं।
2. सीडिंग एजेंट (Seed) का छिड़काव:
सिल्वर आयोडाइड (Silver Iodide), सोडियम क्लोराइड (NaCl) या सूखा बर्फ (Dry Ice) जैसे रसायनों को हवाई जहाज, ड्रोन, या रॉकेट की मदद से इन बादलों में डाला जाता है।
3. बादलों में संघनन (Condensation):
ये रसायन बादलों में जाकर पानी की बूंदों को आकर्षित करते हैं और उन्हें बड़ा बनाते हैं। इससे बूंदें भारी होकर जमीन पर गिरती हैं — और बारिश होती है।
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📍 कृत्रिम बारिश क्यों की जाती है?
1. सूखे की स्थिति में राहत देने के लिए
2. खेती के लिए पानी उपलब्ध कराने के लिए
3. वायु प्रदूषण (जैसे दिल्ली में स्मॉग) को कम करने के लिए
4. वनाग्नि (Forest Fires) को बुझाने में मदद के लिए
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❗ ध्यान देने योग्य बातें
यह प्रक्रिया तभी सफल होती है जब बादलों में पर्याप्त नमी हो।
यह पूरी तरह से गारंटीड नहीं है — कभी-कभी प्रयास सफल नहीं भी होता।
इसके पर्यावरणीय प्रभावों पर भी शोध चल रहा है।
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