स्थान:
सालासर गांव, चुरू ज़िला, राजस्थान
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🔱 मान्यता और विशेषताएं:
1. स्वयंभू मूर्ति (स्वतः प्रकट हुई मूर्ति):
यह मान्यता है कि बालाजी की मूर्ति खेत में जुताई करते समय एक किसान को मिली थी, और वह अपने आप उभर कर आई थी। यही मूर्ति सालासर लाकर स्थापित की गई।
2. भव्य रूप:
सालासर बालाजी की मूर्ति अन्य हनुमान मूर्तियों से अलग है। यहां हनुमान जी की मूर्ति में दाढ़ी और मूंछें हैं, जो एक विशेष और दुर्लभ रूप है।
3. इच्छा पूर्ति:
भक्तों का विश्वास है कि यहाँ सच्चे मन से मांगी गई मन्नत अवश्य पूरी होती है। लोग खासकर नौकरी, विवाह, संतान सुख और रोग से मुक्ति के लिए यहाँ दर्शन करने आते हैं।
4. नवरात्रि और हनुमान जयंती पर विशेष मेले:
इन अवसरों पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने आते हैं।
5. दुर्गंध रहित भोग:
मंदिर में बालाजी को विशेष चूरमे का भोग लगाया जाता है, जिसमें देसी घी और विशेष सामग्री होती है। कहा जाता है कि यह प्रसाद कभी खराब नहीं होता।
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🧭 कैसे पहुँचें:
नजदीकी रेलवे स्टेशन: सुजानगढ़ और रतनगढ़
बस सुविधा: जयपुर, दिल्ली, बीकानेर, सीकर, चुरू आदि से नियमित बसें चलती हैं।
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